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User:Manidiwakar
अज्ञान तिमिरांधस्य ज्ञानांजन शलाकया । चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ॥
स्वागतम् !!
मेरा नाम दिवाकर मणि है । मूलतः बिहार राज्य के गोपालगंज जिले का निवासी हूँ । मेरी मातृभाषा भोजपुरी है । अस्तु, स्नातक तक की शिक्षा अपने जनपद से करने के पश्चात् 2002 ई. में नई दिल्ली चला आया । छोटी जगह से अचानक बड़ी जगह जाने पर दिमाग भी थोड़ा चकरा जाता है । यही हाल उन दिनों मेरा था । क्या करना चाहिए, यह प्रश्न मन में बराबर बना रहता था । चूंकि एक संस्कृतज्ञ व शिक्षक पिता का पुत्र होने के कारण और स्नातक में भी संस्कृत का अध्ययन किए जाने के कारण मन में आया कि चलो बी.एड. कर लिया जाए, और इस दिशा में दिल्ली का भ्रमण करने लगा । इसी क्रम में लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ से अपना परिचय हुआ, और ज्ञात हुआ कि यहां से शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) होती है, यह जानकारी होने के बाद मैंने वहां के लिए आवेदन कर दिया और प्रवेश परीक्षा में सफल होकर बी.एड. की डिग्री भी प्राप्त कर ली । पुनः एक बार किंकर्तव्यविमूढ़ता की स्थिति ने आ जकड़ा कि अब क्या करना चाहिए...... तभी मालूम हुआ कि उसी साल (2003) से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री मान्यवर डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी की कृपा से एक संस्कृत विभाग की स्थापना हुई है, और उसमें एम.ए. का पाठ्यक्रम शुरु हुआ है । फिर क्या था, वहां के लिए भी आवेदन कर दिया । प्रवेश-परीक्षा परिणाम निकलने पर सफलता हाथ लगी और एम.ए. में दाखिला हो गया ।
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि ये मैं कौन सा पुराण लेकर बैठ गया । तो मित्रो ! यही वह समय था जब मेरे जीवन को एक नई दिशा मिली और मैंने इसी सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को अपने अर्थोपार्जन का माध्यम बनाने का निश्चय किया, लेकिन सूचना-प्रौद्योगिकी से मैंने अपने जुड़ाव को संस्कृत, हिंदी और अपनी मातृभाषा भोजपुरी के साथ गठबंधित करने का निर्णय भी लिया । खैर, 2005 में एम.ए. (संगणकीय संस्कृत) में करने के बाद जे.एन.यू. से ही एम.फिल. भी किया । मेरा एम.फिल. का शोधविषय "Online Indexing of Mahabharata (Adiparva)" है । इस हेतु जो R&D कार्य विकसित किया, वह यहां उपलब्ध है । इसके अलावे अपने एम.ए. कोर्स के दौरान संस्कृत संधि-जेनेरेटर, दुर्गा-सप्तशती अनुक्रमणिका इत्यादि कतिपय सिस्टम विकसित किए । वर्तमान में वहीं से "संस्कृत से हिंदी में मशीनी अनुवाद में डाइवर्जेंस की समस्या का आलोचनात्मक अध्ययन" (A Critical Study of Sanskrit-HIndi Machine Translation Divergence) को लेकर डॉ. गिरीश नाथ झा (एसोसिएट प्रोफेसर, संस्कृत केंद्र, जे.एन.यू.) और डॉ. हेमंत दरबारी (कार्यकारी निदेशक, सी-डैक, पुणे) के निर्देशन में अपनी पी.एच.डी. कर रहा हूं, साथ ही सी-डैक, पुणे में भाषावैज्ञानिक के रूप में भी सेवारत हूं ।
बहुभाषी समाज में रहने के लिए केवल एक भाषा का ज्ञान होना काफी नहीं है, अतः मातृभाषा भोजपुरी के अलावे हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान रखता हूं । मेरी शोध रुचियों में सम्मिलित हैं- संगणकीय भाषाविज्ञान, संगणकीय कोषविज्ञान, मशीनी अनुवाद, ई-शिक्षण, स्थानिकीकरण (लोकलाइजेशन), वेब आधारित प्रौद्योगिकी, आर.डी.बी.एम.एस. तकनीक, संस्कृत एवं हिंदी भाषाविज्ञान । पूर्व में मैंने माइक्रोसॉफ्ट, सी-डैक इत्यादि को लोकलाइजेशन के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे चुका हूं । स्वैच्छिक रूप से गूगल के अनुप्रयोगों के हिंदी, संस्कृत और भोजपुरी में लोकलाइजेशन में सेवाएं देता रहता हूं, फेसबुक के संस्कृत संस्करण हेतु दिए गए मेरे योगदान के कारण मुझे फ़ेसबुक द्वारा सम्मानित भी किया गया है । विकिपीडिया पर भी मैं कतिपय 3-4 सालों से हूं, और इसको भी मैं यदा-कदा हिंदी, संस्कृत और भोजपुरी (लक्ष्य भाषा के रूप में) के लिए अपना योगदान देता रहता हूं ।
--Manidiwakar 05:44, 14 January 2011 (UTC)